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Song 470

जो क्रूस पे कुर्बान है, वो मेरा मसीहा है

जो क्रूस पे कुर्बान है, वो मेरा मसीहा है हर ज़ख़्म जो उसका है, वो मेरे गुनाह का है Verse इस दुनिया में ले आये, मेरे ही गुनाह उसको ये जुलुम-ओ-सिथम उस पर, मैंने ही कराया है Verse इंसान है वो कामिल, और सच्चा खुदा वो है वो प्यार का दरिया है, सचाई का रास्ता है Verse देने को मुझे जीवन, खुद मौत सही उसने क्या खूब है क़ुरबानी, क्या प्यार अनोखा है