Song 435
गाऊँगा में तेरे ही गीत
गाऊँगा में तेरे ही गीत,
हे यिशु तू हे महान
तेरा ही नाम मेरे मसि,
लेता हुं सुबह और शाम (2)
1 जब में गुनाहों में पड़ा, तेरे प्रेम से में दूर था
तेरे सम्मुख आने के लायक, में कदापी योग्य न था (2)
पर तुही मेरे सहारा बना, अपने पास मुझे बुलाया
इसलिए मसिहा ऒठों से अपनी, स्तुती तेरी करँगा;-
2 तेरे अनुग्रह तेरी दया को , कैसे भूलूं में मसि
मेरे शाप को तुने हटाकर, कूद शापित बना मसि (2)
तु ने क्रूस पर लहू, बहकर मुझे, पापों से शुद्ध किया
मेरे आंसूऑ को पोछकर, सरे दुक दूर किया;
गाऊंगा मैं तेरे ही गीत
हे यीशु तू है महान
तेरा ही नाम मेरे मसीह
लेता हुं सुबह और शाम
जब मैं गुनाहों में पड़ा
तेरे प्रेम से मैं दूर था
तेरे सम्मुख आने के लायक
मैं कदापि योग्य न था
पर तू ही मेरा सहारा बना
अपने पास मुझे बुलाया
इसलिए मसीह होठों से अपने
स्तुती तेरी करूंगा
Verse
तेरे अनुग्रह तेरी दया को
कैसे भूलूं मैं मसीह
मेरे शाप को तुने हटाकर
खुद शापित बना मसीह
तु ने क्रूस पर लहू बहाकर
मुझे पापों से शुद्ध किया
मेरे आंसुओं को पोछकर
सारा दुख दूर किया