Song 386
जख्मों से छलनी, झरना लहू का
Verse
जख्मों से छलनी, झरना लहू का
तन से निकल रहा था
चलना कितना मुश्किल था तू
फिर भी चल रहा था
मेरी खातिर, सबकी खातिर
Verse
दर्दों को सहकर, जख्मों को सहकर
मुझको शिफा दे गया तू
जिन्होंने मारा, जिन्होंने कुचला
उनको दुआ दे गया तू
तेरे लहू से, जो बह रहा था
सब कुछ बदल रहा था
Verse
कोड़े जो खाए, तूने उठाई
सूली जो मेरी वजह से
सबसे थी सुन्दर, सूरत वो तेरी
बिगड़ी जो मेरी वजह से
गिर भी रहा था, तू मेरी वजह से
पर फिर संभल रहा था
Verse
तेरी दया को, तेरे फज़ल को
कैसे मैं यीशु भुला दूँ?
एहसान पूरा होगा न तेरा
खुद को भी गर मैं मिटा दूँ
तू था पवित्र, पर मेरी खातिर
पापों में तू ढल रहा था