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Song 401

मैं उकाब हूं

Chorus मैं उकाब हूं उड़ने के लिए पैदा हुआ हूं अनदेखे देखने के लिए अलैदा हुआ हूं Verse मां उकाब के थे दो अंडे एक किसान ले आया मुर्गी के अंडों में उसने इस अंडे को मिलाया छिलका तोड़के एक दिन मैं अंडे से बाहर आया बाहर आकर मैंने खुदको चूजों के बीच में पाया Verse डिनोमिनेशन चूजों के संग कूड़े से था खाया एक दिन मां ने चीख लगाकर मुझको बाहर बुलाया मां की चीख को सुनकर मैं दड़बे से बाहर आया दूसरी चीख में उसने खुदको तीस मील फैलाया आखर में आकाश की मुझको ऊंचाई में उड़ाया Verse उड़ चला आंधी की मैं फिर संस्नाहट्ट के ऊपर उड़ चला संगीत की मैं फिर उस सरगम के ऊपर उड़ चला तालियों की फिर गड़गड़ाहट के ऊपर उड़ चला संसार की हर एक उस चाहत के ऊपर जहा न सीमा, ध्वनि की गति की उस गति के ऊपर Chorus सफेद उकाब हूं उड़ने के लिए पैदा हुआ हूं सफेद फाक्ता की अगवाई में उड़ता जाता हूं