Song 385
मैं उकाब हूं
Chorus
मैं उकाब हूं
उड़ने के लिए पैदा हुआ हूं
अनदेखे देखने के लिए
अलैदा हुआ हूं
Verse
मां उकाब के थे दो अंडे
एक किसान ले आया
मुर्गी के अंडों में उसने
इस अंडे को मिलाया
छिलका तोड़के एक दिन
मैं अंडे से बाहर आया
बाहर आकर मैंने खुदको
चूजों के बीच में पाया
Verse
डिनोमिनेशन चूजों के संग
कूड़े से था खाया
एक दिन मां ने चीख लगाकर
मुझको बाहर बुलाया
मां की चीख को सुनकर मैं
दड़बे से बाहर आया
दूसरी चीख में उसने खुदको
तीस मील फैलाया
आखर में आकाश की मुझको
ऊंचाई में उड़ाया
Verse
उड़ चला आंधी की मैं फिर
संस्नाहट्ट के ऊपर
उड़ चला संगीत की मैं फिर
उस सरगम के ऊपर
उड़ चला तालियों की फिर
गड़गड़ाहट के ऊपर
उड़ चला संसार की हर एक
उस चाहत के ऊपर
जहा न सीमा, ध्वनि की गति की
उस गति के ऊपर